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कैब से जोधपुर दर्शन

2 दिन में जोधपुर घूमने की जगह

पहला दिन किले और पुराने शहर का है: 08:00 बजे राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क, मेहरानगढ़, जसवंत थड़ा, तूरजी का झालरा और घंटाघर का बाज़ार, करीब 11 km, और दोपहर बाद तक वापसी। दूसरा दिन उम्मेद भवन, मंडोर गार्डन, माचिया बायोलॉजिकल पार्क और कायलाना झील का है, करीब 41 km।

9 जगहें52 km कैब सेखुलने के समय के हिसाब से
आपके पास कितना समय है?
दिन 1

मेहरानगढ़, जसवंत थड़ा और पुराना शहर

किले की दीवारों के नीचे राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क से शुरू करें, जब यह 08:00 बजे खुलता है। करीब 09:05 पर मेहरानगढ़, ढाई घंटे के लिए, फिर करीब 11:40 पर जसवंत थड़ा और लंच। करीब 13:35 पर तूरजी का झालरा और करीब 14:05 से घंटाघर का बाज़ार। कैब से करीब 11 km, वापसी करीब 15:15 तक, और शाम पुराने शहर की नीली गलियों में पैदल घूमने के लिए खाली। किसी भी दिन चलेगा।

07:45 से 15:125 जगहें11 km कैब से
  1. 1राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क
  2. 2मेहरानगढ़ किला
  3. 3जसवंत थड़ा
  4. खाना
  5. 4तूरजी का झालरा (बावड़ी)
  6. 5घंटाघर और सरदार मार्केट
  7. वापसी
  1. जोधपुर शहर से निकलें
  2. 1

    राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क

    यहाँ 1 घंटा
    राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क
    फ़ोटो: T. R. Shankar Raman, CC BY-SA 4.0

    मेहरानगढ़ की दीवारों के ठीक नीचे रेगिस्तानी पौधों और लाल ज्वालामुखी चट्टानों का पार्क, जिसमें 2006 से थार के देसी पौधे फिर से लगाए गए। निशान लगे रास्ते चट्टानों के ऊपर और पुरानी पानी की नालियों के साथ-साथ चलते हैं, और किले और नीले शहर का नज़ारा दिखता है।

    झील, बाग और रेगिस्तानअक्टूबर से मार्च 08:00 से 17:30, अप्रैल से सितंबर 07:00 से 18:30, हर दिन। ₹100, या गाइड वाली सैर के साथ ₹200

    सलाह: पानी और टोपी साथ रखें; छाँव बहुत कम है। अगर पौधे और पंछी पसंद हैं तो गाइड वाली सैर अच्छी है।

  3. 2

    मेहरानगढ़ किला

    यहाँ 2 घंटे 30 मिनट
    मेहरानगढ़ किला
    फ़ोटो: Knowledge Seeker, Public domain

    भारत के सबसे बड़े किलों में से एक, जिसे राव जोधा ने 1459 से शहर से करीब 120 m ऊपर एक चट्टान पर बनवाना शुरू किया। अंदर नक्काशी वाले बलुआ पत्थर के महल हैं, मोती महल और फूल महल, और एक संग्रहालय जिसमें राजाओं की पालकियाँ, हाथी के हौदे, पेंटिंग और हथियार हैं। दीवारों से नीचे पुराने शहर के नीले घर दिखते हैं। किले की दीवार के आखिरी छोर पर चामुंडा माता का मंदिर है।

    किले और महलखुला: 09:00 से 17:00, हर दिन; एक लिस्टिंग के हिसाब से आखिरी एंट्री 16:30 पर है। टिकट गेट पर या ऑनलाइन; ऑडियो गाइड विदेशियों के टिकट में शामिल है और भारतीयों के लिए अलग से

    सलाह: गेट के पास से महलों तक ऊपर जाने के लिए लिफ़्ट है, तो ज़्यादातर चढ़ाई से बच सकते हैं। ऐसे जूते पहनें जो फिसलें नहीं: पत्थर की ढलानें चिकनी हैं। कम से कम ढाई घंटे रखें।

  4. 3

    जसवंत थड़ा

    यहाँ 45 मिनट
    जसवंत थड़ा
    फ़ोटो: Jakub Hałun, CC BY-SA 4.0

    महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में 1899 में बना सफ़ेद संगमरमर का स्मारक। इसकी संगमरमर की दीवारें इतनी पतली हैं कि धूप पड़ने पर चमक उठती हैं। आसपास बाद के राजाओं की छोटी छतरियाँ, सीढ़ीदार बाग और एक छोटी झील है, और यहाँ से ऊपर किले का अच्छा नज़ारा दिखता है।

    किले और महलखुला: 09:00 से 17:00, हर दिन। छोटा सा एंट्री टिकट

    सलाह: मुख्य हॉल के अंदर जूते उतारने होते हैं। किले के बाद आराम करने के लिए यह एक शांत जगह है।

  5. खाना, करीब 1 घंटा। ड्राइवर को पास की कोई जगह पता होगी। इसके बाद का समय इसे जोड़कर है।
  6. 4

    तूरजी का झालरा (बावड़ी)

    यहाँ 30 मिनट
    तूरजी का झालरा (बावड़ी)
    फ़ोटो: Dr. Raju Kasambe, CC BY-SA 4.0

    1740 के दशक की एक गहरी बावड़ी, जिसे महाराजा अभय सिंह की एक रानी ने बनवाया था। इसमें नक्काशी वाले बलुआ पत्थर की सीढ़ियों की कतारें पानी तक नीचे जाती हैं। 2010 के दशक में इसे साफ़ करके फिर से खोला गया, और अब कैफ़े और दुकानें इसके ऊपर से दिखती हैं।

    बावड़ी और बाज़ारदिन की रोशनी में खुला, मुफ़्त

    सलाह: सीढ़ियाँ खड़ी हैं और रेलिंग नहीं है, इसलिए बच्चों का ध्यान रखें। यह घंटाघर से थोड़ी ही पैदल दूरी पर है, जहाँ कैब रुकती है।

  7. 5

    घंटाघर और सरदार मार्केट

    यहाँ 1 घंटा
    घंटाघर और सरदार मार्केट
    फ़ोटो: Nishant.chawla123, CC BY-SA 4.0

    यह घंटाघर महाराजा सरदार सिंह ने बनवाया था, जिन्होंने 1880 से 1911 तक राज किया। यह पुराने शहर के मुख्य बाज़ार, सरदार मार्केट, के बीच में खड़ा है। आसपास की गलियों में मसाले, बंधेज का कपड़ा, चूड़ियाँ, चाँदी और मोजड़ी जूते मिलते हैं। गेट के पास के ठेलों पर मखनिया लस्सी या मिर्ची वड़ा ज़रूर खाएँ।

    बावड़ी और बाज़ारचौक हमेशा खुला रहता है; ज़्यादातर दुकानें करीब 10:00 से 21:00 तक, हर दिन खुलती हैं

    सलाह: मुस्कुराकर मोलभाव करें। किले के नीचे नवचोकिया और ब्रह्मपुरी की नीली गलियाँ यहाँ से पैदल की दूरी पर हैं; सबसे नीली गलियाँ ढूँढनी हों तो किसी लोकल गाइड के साथ जाएँ।

  8. वापस जोधपुर शहर
दिन 2

उम्मेद भवन, मंडोर और कायलाना झील

करीब 09:30 पर उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम, फिर करीब 10:50 पर छतरियों और हॉल ऑफ़ हीरोज़ के लिए मंडोर गार्डन, और लंच। करीब 13:40 पर माचिया बायोलॉजिकल पार्क और करीब 15:20 पर कायलाना झील। कैब से करीब 41 km, वापसी करीब 16:45 तक; सूरज ढलने तक कायलाना पर रुकें (सर्दियों में करीब 17:50) तो एक-दो घंटे बाद लौटेंगे। मंगलवार को नहीं, उस दिन माचिया बंद रहता है।

09:15 से 16:434 जगहें41 km कैब से
  1. 1उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम
  2. 2मंडोर गार्डन
  3. खाना
  4. 3माचिया बायोलॉजिकल पार्क
  5. 4कायलाना झील
  6. वापसी
  1. जोधपुर शहर से निकलें
  2. 1

    उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम

    यहाँ 1 घंटा
    उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम
    फ़ोटो: Prashantkovhal, CC BY-SA 4.0

    भारत में बने आखिरी बड़े महलों में से एक, जो 1943 में महाराजा उम्मेद सिंह के लिए सुनहरे बलुआ पत्थर से बनकर तैयार हुआ, और अंदर से आर्ट डेको स्टाइल में है। इसके एक हिस्से में आज भी राजपरिवार रहता है और एक हिस्सा होटल है। म्यूज़ियम वाले हिस्से में घड़ियाँ, बर्तन, पेंटिंग और परिवार की फ़ोटो हैं, और बाहर बाग में महाराजा की पुरानी विंटेज कारें खड़ी हैं।

    किले और महलज़्यादातर सोर्स के हिसाब से 09:00 से 17:00, हर दिन; कुछ कहते हैं रविवार को बंद या 10:00 से 16:30 तक खुला। सामने के बाग की विंटेज कारें उसी टिकट में हैं

    सलाह: घूमने वालों के लिए सिर्फ़ म्यूज़ियम और कारों वाला बाग खुला है; बाकी हिस्सा होटल के मेहमानों के लिए है। रविवार को जाने से पहले पता कर लें कि म्यूज़ियम खुला है या नहीं।

  3. 2

    मंडोर गार्डन

    यहाँ 1 घंटा 30 मिनट
    मंडोर गार्डन
    फ़ोटो: Jon Connell from Cambridge, UK, CC BY 2.0

    जोधपुर से पहले मंडोर मारवाड़ की राजधानी था, शहर से करीब 9 km उत्तर में। इस बाग में राठौड़ राजाओं की लाल बलुआ पत्थर की ऊँची छतरियाँ हैं, जिन्हें देवल कहते हैं और जो मंदिरों जैसी बनी हैं। हॉल ऑफ़ हीरोज़ में एक ही चट्टान की दीवार में तराशी गई देवताओं और लोक नायकों की बड़ी रंगीन मूर्तियाँ हैं, और पुराने महल में एक छोटा संग्रहालय है। पेड़ों पर लंगूर बंदर रहते हैं।

    झील, बाग और रेगिस्तानबाग हर दिन दिन की रोशनी में खुला और मुफ़्त है। अंदर का स्टेट म्यूज़ियम 09:45 से 17:15 तक खुलता है (भारतीयों के लिए ₹20, विदेशियों के लिए ₹100); एक सोर्स कहता है सोमवार को बंद रहता है

    सलाह: खाना छिपाकर रखें: बंदर छीन लेते हैं। पुराने मंडोर किले के खंडहर छतरियों के पीछे पहाड़ी पर हैं, थोड़ी सी चढ़ाई है।

  4. खाना, करीब 1 घंटा। ड्राइवर को पास की कोई जगह पता होगी। इसके बाद का समय इसे जोड़कर है।
  5. 3

    माचिया बायोलॉजिकल पार्क

    यहाँ 1 घंटा 30 मिनट
    मंगलवार को बंद

    शहर के पश्चिम में पथरीली झाड़ियों के बीच एक बड़ा खुला चिड़ियाघर। इसमें शेर, तेंदुए, भालू, काले हिरण, चिंकारा, रेगिस्तानी लोमड़ी और बहुत सारे पंछी हैं, जो पैदल घूमने वाले रास्ते के साथ बड़े बाड़ों में रहते हैं। ऊपर पहाड़ी पर एक छोटा किला है।

    झील, बाग और रेगिस्तानअक्टूबर से मार्च 08:30 से 17:00, गर्मियों में 08:00 से 18:00। मंगलवार को बंद, और गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर भी बंद

    सलाह: घूमने का रास्ता लंबा है और कुछ हिस्सा चढ़ाई वाला है, इसलिए पानी साथ रखें और गर्मी के महीनों में जल्दी जाएँ।

  6. 4

    कायलाना झील

    यहाँ 1 घंटा
    कायलाना झील
    फ़ोटो: Archan dave, CC BY-SA 3.0

    शहर से करीब 8 km पश्चिम में पथरीली पहाड़ियों के बीच एक बड़ी झील, जिसे 1872 में प्रताप सिंह ने बनवाया। यह शहर का पानी का भंडार है, चारों तरफ़ लाल चट्टानें और झाड़ियाँ हैं, और यहाँ झील के किनारे सड़क, एक व्यू पॉइंट और नावें हैं। सर्दियों में पंछी आते हैं।

    झील, बाग और रेगिस्तानझील का किनारा दिन की रोशनी में खुला और मुफ़्त है। नावें करीब 08:00 से 18:00 तक चलती हैं (एक सोर्स के हिसाब से), करीब ₹100 से ₹250 तक?

    सलाह: सूरज सर्दियों में करीब 17:50 पर और जून में 19:25 पर ढलता है। नावें सूरज ढलने से पहले बंद हो सकती हैं, इसलिए पहले नाव की सैर करें और फिर किनारे से नज़ारा देखें।

  7. वापस जोधपुर शहर

गाड़ी का समय सड़क के रास्ते से निकाला गया है, ट्रैफ़िक जोड़े बिना। घंटाघर के आसपास पुराने शहर की गलियाँ पतली और भीड़ वाली हैं, इसलिए कैब सरदार मार्केट के पास रुकती है और आप पैदल अंदर जाते हैं। करीब 10:00 बजे टूर बसें आने पर मेहरानगढ़ की चढ़ाई वाली सड़क धीमी हो जाती है। ओसियां वाले दिन नक्शे में दिखे समय से हर तरफ़ करीब 30 मिनट ज़्यादा रखें। जिन जगहों के समय के आगे ? लगा है, वे अभी पक्के नहीं हैं, इसलिए जाने से पहले पता कर लें।

इन 2 दिनों के लिए कैब बुक करें

यह प्लान लेकर जोधपुर के किसी लोकल ऑपरेटर को फ़ोन या मैसेज करें। अपना होटल और तारीख बताएँ, वे गाड़ी और ड्राइवर का किराया बताएँगे।

2 × पूरा दिन, 8 घंटे / 80 kmसेडान, SUV या इनोवाकिराया ऑपरेटर बताएगा

इस प्लान की जगहों के खुलने का समय

यही समय देखकर प्लान बना है। छुट्टी या त्योहार के दिन जाने से पहले पता कर लें।

जगहखुलने का समयजाने का सही समयकितनी देर
राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्कअक्टूबर से मार्च 08:00 से 17:30, अप्रैल से सितंबर 07:00 से 18:30, हर दिन। ₹100, या गाइड वाली सैर के साथ ₹200सुबह जल्दी, खुलते ही और चट्टानें गरम होने से पहले।1 घंटा
मेहरानगढ़ किला09:00 से 17:00, हर दिन; एक लिस्टिंग के हिसाब से आखिरी एंट्री 16:30 पर है। टिकट गेट पर या ऑनलाइन; ऑडियो गाइड विदेशियों के टिकट में शामिल है और भारतीयों के लिए अलग से09:00 बजे खुलते ही, गर्मी और टूर बसों से पहले।2 घंटे 30 मिनट
जसवंत थड़ा09:00 से 17:00, हर दिन। छोटा सा एंट्री टिकटमेहरानगढ़ के ठीक बाद, पहाड़ी से कुछ मिनट नीचे।45 मिनट
तूरजी का झालरा (बावड़ी)दिन की रोशनी में खुला, मुफ़्तदोपहर बाद, जब धूप नक्काशी वाली सीढ़ियों पर पड़ती है।30 मिनट
घंटाघर और सरदार मार्केटचौक हमेशा खुला रहता है; ज़्यादातर दुकानें करीब 10:00 से 21:00 तक, हर दिन खुलती हैंदेर दोपहर और शाम, जब बाज़ार में सबसे ज़्यादा रौनक होती है।1 घंटा
उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियमज़्यादातर सोर्स के हिसाब से 09:00 से 17:00, हर दिन; कुछ कहते हैं रविवार को बंद या 10:00 से 16:30 तक खुला। सामने के बाग की विंटेज कारें उसी टिकट में हैंसुबह या दोपहर की शुरुआत में।1 घंटा
मंडोर गार्डनबाग हर दिन दिन की रोशनी में खुला और मुफ़्त है। अंदर का स्टेट म्यूज़ियम 09:45 से 17:15 तक खुलता है (भारतीयों के लिए ₹20, विदेशियों के लिए ₹100); एक सोर्स कहता है सोमवार को बंद रहता हैसुबह या देर दोपहर, जब ठंडक होती है।1 घंटा 30 मिनट
माचिया बायोलॉजिकल पार्कअक्टूबर से मार्च 08:30 से 17:00, गर्मियों में 08:00 से 18:00। मंगलवार को बंद, और गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर भी बंदसुबह या दोपहर की शुरुआत में; दोपहर की गर्मी में जानवर आराम करते हैं।1 घंटा 30 मिनट
कायलाना झीलझील का किनारा दिन की रोशनी में खुला और मुफ़्त है। नावें करीब 08:00 से 18:00 तक चलती हैं (एक सोर्स के हिसाब से), करीब ₹100 से ₹250 तक?देर दोपहर; झील पश्चिम की तरफ़ है, तो हो सके तो सूरज ढलने तक रुकें।1 घंटा

जोधपुर में समय कम या ज़्यादा है?

लोग ये भी पूछते हैं

क्या जोधपुर के लिए 2 दिन काफ़ी हैं?

हाँ, शहर के लिए। दो दिन में आराम से किला, पुराना शहर, उम्मेद भवन, मंडोर और कायलाना झील देख लेते हैं। ओसियां के मंदिरों के लिए तीसरा दिन जोड़ें।

हफ़्ते का कौन सा दिन न रखें?

दूसरा दिन मंगलवार को न रखें, उस दिन माचिया बायोलॉजिकल पार्क बंद रहता है। पहला दिन किसी भी दिन चलेगा, तो अगर आपकी ट्रिप में मंगलवार आता है तो दोनों दिन आपस में बदल लें।

पहला दिन छोटा क्यों है?

किले वाली सुबह जोधपुर का सबसे थकाने वाला हिस्सा है, और पुराना शहर शाम को पैदल सबसे अच्छा लगता है। आप करीब 15:15 तक लौट आते हैं, और नवचोकिया और ब्रह्मपुरी की नीली गलियों या किले के सामने किसी छत पर डिनर के लिए समय बचता है।

क्या कायलाना झील पर सूरज ढलते देख सकते हैं?

हाँ, अगर आप रुकें। प्लान में आप करीब 15:20 पर झील पहुँचते हैं; सूरज सर्दियों में करीब 17:50 पर और जून में 19:25 पर ढलता है। दिन की शुरुआत में ही कैब ड्राइवर को बता दें, क्योंकि इससे दिन लंबा हो जाता है।