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कैब से जोधपुर दर्शन

1 दिन में जोधपुर घूमने की जगह

09:00 बजे खुलते ही मेहरानगढ़ किला पहुँचें और लंच से पहले बगल का जसवंत थड़ा देख लें। दोपहर में करीब 13:40 पर मंडोर गार्डन और करीब 15:25 पर उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम। दिन करीब 16:40 से तूरजी का झालरा और घंटाघर के बाज़ार पर खत्म करें। कैब से करीब 29 km, वापसी करीब 18:15 तक।

6 जगहें29 km कैब सेखुलने के समय के हिसाब से
आपके पास कितना समय है?
दिन 1

मेहरानगढ़, मंडोर, उम्मेद भवन और घंटाघर

08:45 पर निकलें ताकि 09:00 बजे खुलते ही मेहरानगढ़ पहुँचें, और इसे ढाई घंटे दें। करीब 11:35 पर बगल में जसवंत थड़ा, फिर लंच। करीब 13:40 पर मंडोर गार्डन, करीब 15:25 पर उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम, और करीब 16:40 से तूरजी का झालरा और घंटाघर का बाज़ार, जब बाज़ार में रौनक होती है। कैब से करीब 29 km, वापसी करीब 18:15 तक। करीब 9.5 घंटे का यह एक लंबा दिन है।

08:45 से 18:156 जगहें29 km कैब से
  1. 1मेहरानगढ़ किला
  2. 2जसवंत थड़ा
  3. खाना
  4. 3मंडोर गार्डन
  5. 4उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम
  6. 5तूरजी का झालरा (बावड़ी)
  7. 6घंटाघर और सरदार मार्केट
  8. वापसी
  1. जोधपुर शहर से निकलें
  2. 1

    मेहरानगढ़ किला

    यहाँ 2 घंटे 30 मिनट
    मेहरानगढ़ किला
    फ़ोटो: Knowledge Seeker, Public domain

    भारत के सबसे बड़े किलों में से एक, जिसे राव जोधा ने 1459 से शहर से करीब 120 m ऊपर एक चट्टान पर बनवाना शुरू किया। अंदर नक्काशी वाले बलुआ पत्थर के महल हैं, मोती महल और फूल महल, और एक संग्रहालय जिसमें राजाओं की पालकियाँ, हाथी के हौदे, पेंटिंग और हथियार हैं। दीवारों से नीचे पुराने शहर के नीले घर दिखते हैं। किले की दीवार के आखिरी छोर पर चामुंडा माता का मंदिर है।

    किले और महलखुला: 09:00 से 17:00, हर दिन; एक लिस्टिंग के हिसाब से आखिरी एंट्री 16:30 पर है। टिकट गेट पर या ऑनलाइन; ऑडियो गाइड विदेशियों के टिकट में शामिल है और भारतीयों के लिए अलग से

    सलाह: गेट के पास से महलों तक ऊपर जाने के लिए लिफ़्ट है, तो ज़्यादातर चढ़ाई से बच सकते हैं। ऐसे जूते पहनें जो फिसलें नहीं: पत्थर की ढलानें चिकनी हैं। कम से कम ढाई घंटे रखें।

  3. 2

    जसवंत थड़ा

    यहाँ 45 मिनट
    जसवंत थड़ा
    फ़ोटो: Jakub Hałun, CC BY-SA 4.0

    महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में 1899 में बना सफ़ेद संगमरमर का स्मारक। इसकी संगमरमर की दीवारें इतनी पतली हैं कि धूप पड़ने पर चमक उठती हैं। आसपास बाद के राजाओं की छोटी छतरियाँ, सीढ़ीदार बाग और एक छोटी झील है, और यहाँ से ऊपर किले का अच्छा नज़ारा दिखता है।

    किले और महलखुला: 09:00 से 17:00, हर दिन। छोटा सा एंट्री टिकट

    सलाह: मुख्य हॉल के अंदर जूते उतारने होते हैं। किले के बाद आराम करने के लिए यह एक शांत जगह है।

  4. खाना, करीब 1 घंटा। ड्राइवर को पास की कोई जगह पता होगी। इसके बाद का समय इसे जोड़कर है।
  5. 3

    मंडोर गार्डन

    यहाँ 1 घंटा 30 मिनट
    मंडोर गार्डन
    फ़ोटो: Jon Connell from Cambridge, UK, CC BY 2.0

    जोधपुर से पहले मंडोर मारवाड़ की राजधानी था, शहर से करीब 9 km उत्तर में। इस बाग में राठौड़ राजाओं की लाल बलुआ पत्थर की ऊँची छतरियाँ हैं, जिन्हें देवल कहते हैं और जो मंदिरों जैसी बनी हैं। हॉल ऑफ़ हीरोज़ में एक ही चट्टान की दीवार में तराशी गई देवताओं और लोक नायकों की बड़ी रंगीन मूर्तियाँ हैं, और पुराने महल में एक छोटा संग्रहालय है। पेड़ों पर लंगूर बंदर रहते हैं।

    झील, बाग और रेगिस्तानबाग हर दिन दिन की रोशनी में खुला और मुफ़्त है। अंदर का स्टेट म्यूज़ियम 09:45 से 17:15 तक खुलता है (भारतीयों के लिए ₹20, विदेशियों के लिए ₹100); एक सोर्स कहता है सोमवार को बंद रहता है

    सलाह: खाना छिपाकर रखें: बंदर छीन लेते हैं। पुराने मंडोर किले के खंडहर छतरियों के पीछे पहाड़ी पर हैं, थोड़ी सी चढ़ाई है।

  6. 4

    उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम

    यहाँ 1 घंटा
    उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियम
    फ़ोटो: Prashantkovhal, CC BY-SA 4.0

    भारत में बने आखिरी बड़े महलों में से एक, जो 1943 में महाराजा उम्मेद सिंह के लिए सुनहरे बलुआ पत्थर से बनकर तैयार हुआ, और अंदर से आर्ट डेको स्टाइल में है। इसके एक हिस्से में आज भी राजपरिवार रहता है और एक हिस्सा होटल है। म्यूज़ियम वाले हिस्से में घड़ियाँ, बर्तन, पेंटिंग और परिवार की फ़ोटो हैं, और बाहर बाग में महाराजा की पुरानी विंटेज कारें खड़ी हैं।

    किले और महलज़्यादातर सोर्स के हिसाब से 09:00 से 17:00, हर दिन; कुछ कहते हैं रविवार को बंद या 10:00 से 16:30 तक खुला। सामने के बाग की विंटेज कारें उसी टिकट में हैं

    सलाह: घूमने वालों के लिए सिर्फ़ म्यूज़ियम और कारों वाला बाग खुला है; बाकी हिस्सा होटल के मेहमानों के लिए है। रविवार को जाने से पहले पता कर लें कि म्यूज़ियम खुला है या नहीं।

  7. 5

    तूरजी का झालरा (बावड़ी)

    यहाँ 30 मिनट
    तूरजी का झालरा (बावड़ी)
    फ़ोटो: Dr. Raju Kasambe, CC BY-SA 4.0

    1740 के दशक की एक गहरी बावड़ी, जिसे महाराजा अभय सिंह की एक रानी ने बनवाया था। इसमें नक्काशी वाले बलुआ पत्थर की सीढ़ियों की कतारें पानी तक नीचे जाती हैं। 2010 के दशक में इसे साफ़ करके फिर से खोला गया, और अब कैफ़े और दुकानें इसके ऊपर से दिखती हैं।

    बावड़ी और बाज़ारदिन की रोशनी में खुला, मुफ़्त

    सलाह: सीढ़ियाँ खड़ी हैं और रेलिंग नहीं है, इसलिए बच्चों का ध्यान रखें। यह घंटाघर से थोड़ी ही पैदल दूरी पर है, जहाँ कैब रुकती है।

  8. 6

    घंटाघर और सरदार मार्केट

    यहाँ 1 घंटा
    घंटाघर और सरदार मार्केट
    फ़ोटो: Nishant.chawla123, CC BY-SA 4.0

    यह घंटाघर महाराजा सरदार सिंह ने बनवाया था, जिन्होंने 1880 से 1911 तक राज किया। यह पुराने शहर के मुख्य बाज़ार, सरदार मार्केट, के बीच में खड़ा है। आसपास की गलियों में मसाले, बंधेज का कपड़ा, चूड़ियाँ, चाँदी और मोजड़ी जूते मिलते हैं। गेट के पास के ठेलों पर मखनिया लस्सी या मिर्ची वड़ा ज़रूर खाएँ।

    बावड़ी और बाज़ारचौक हमेशा खुला रहता है; ज़्यादातर दुकानें करीब 10:00 से 21:00 तक, हर दिन खुलती हैं

    सलाह: मुस्कुराकर मोलभाव करें। किले के नीचे नवचोकिया और ब्रह्मपुरी की नीली गलियाँ यहाँ से पैदल की दूरी पर हैं; सबसे नीली गलियाँ ढूँढनी हों तो किसी लोकल गाइड के साथ जाएँ।

  9. वापस जोधपुर शहर

गाड़ी का समय सड़क के रास्ते से निकाला गया है, ट्रैफ़िक जोड़े बिना। घंटाघर के आसपास पुराने शहर की गलियाँ पतली और भीड़ वाली हैं, इसलिए कैब सरदार मार्केट के पास रुकती है और आप पैदल अंदर जाते हैं। करीब 10:00 बजे टूर बसें आने पर मेहरानगढ़ की चढ़ाई वाली सड़क धीमी हो जाती है। ओसियां वाले दिन नक्शे में दिखे समय से हर तरफ़ करीब 30 मिनट ज़्यादा रखें। जिन जगहों के समय के आगे ? लगा है, वे अभी पक्के नहीं हैं, इसलिए जाने से पहले पता कर लें।

इस दिन के लिए कैब बुक करें

यह प्लान लेकर जोधपुर के किसी लोकल ऑपरेटर को फ़ोन या मैसेज करें। अपना होटल और तारीख बताएँ, वे गाड़ी और ड्राइवर का किराया बताएँगे।

1 × पूरा दिन, 8 घंटे / 80 kmसेडान, SUV या इनोवाकिराया ऑपरेटर बताएगा

इस प्लान की जगहों के खुलने का समय

यही समय देखकर प्लान बना है। छुट्टी या त्योहार के दिन जाने से पहले पता कर लें।

जगहखुलने का समयजाने का सही समयकितनी देर
मेहरानगढ़ किला09:00 से 17:00, हर दिन; एक लिस्टिंग के हिसाब से आखिरी एंट्री 16:30 पर है। टिकट गेट पर या ऑनलाइन; ऑडियो गाइड विदेशियों के टिकट में शामिल है और भारतीयों के लिए अलग से09:00 बजे खुलते ही, गर्मी और टूर बसों से पहले।2 घंटे 30 मिनट
जसवंत थड़ा09:00 से 17:00, हर दिन। छोटा सा एंट्री टिकटमेहरानगढ़ के ठीक बाद, पहाड़ी से कुछ मिनट नीचे।45 मिनट
मंडोर गार्डनबाग हर दिन दिन की रोशनी में खुला और मुफ़्त है। अंदर का स्टेट म्यूज़ियम 09:45 से 17:15 तक खुलता है (भारतीयों के लिए ₹20, विदेशियों के लिए ₹100); एक सोर्स कहता है सोमवार को बंद रहता हैसुबह या देर दोपहर, जब ठंडक होती है।1 घंटा 30 मिनट
उम्मेद भवन पैलेस म्यूज़ियमज़्यादातर सोर्स के हिसाब से 09:00 से 17:00, हर दिन; कुछ कहते हैं रविवार को बंद या 10:00 से 16:30 तक खुला। सामने के बाग की विंटेज कारें उसी टिकट में हैंसुबह या दोपहर की शुरुआत में।1 घंटा
तूरजी का झालरा (बावड़ी)दिन की रोशनी में खुला, मुफ़्तदोपहर बाद, जब धूप नक्काशी वाली सीढ़ियों पर पड़ती है।30 मिनट
घंटाघर और सरदार मार्केटचौक हमेशा खुला रहता है; ज़्यादातर दुकानें करीब 10:00 से 21:00 तक, हर दिन खुलती हैंदेर दोपहर और शाम, जब बाज़ार में सबसे ज़्यादा रौनक होती है।1 घंटा

जोधपुर में समय कम या ज़्यादा है?

लोग ये भी पूछते हैं

क्या एक दिन में जोधपुर घूम सकते हैं?

खास जगहें देख सकते हैं: मेहरानगढ़, जसवंत थड़ा, मंडोर, उम्मेद भवन म्यूज़ियम और घंटाघर का बाज़ार। यह करीब 9.5 घंटे का पूरा दिन है। कायलाना झील, माचिया पार्क और ओसियां के लिए ज़्यादा समय चाहिए; 2 और 3 दिन वाले प्लान देखें।

पहले मेहरानगढ़ क्यों जाएँ?

यह 09:00 बजे खुलता है, और टूर बसें आने से पहले पहले घंटे में ठंडक और कम भीड़ रहती है। यह दिन की सबसे लंबी सैर भी है, करीब ढाई घंटे।

क्या यह प्लान किसी भी दिन चलेगा?

हाँ। इसकी हर जगह हर दिन खुली रहती है। कुछ लिस्टिंग कहती हैं कि उम्मेद भवन म्यूज़ियम रविवार को बंद रहता है, इसलिए रविवार को जाने से पहले पता कर लें, और एक सोर्स कहता है कि मंडोर का म्यूज़ियम सोमवार को बंद रहता है (बाग खुला रहता है)।

दिन छोटा कैसे करें?

मंडोर छोड़ दें और लंच के बाद जसवंत थड़ा से सीधे उम्मेद भवन म्यूज़ियम जाएँ। इससे करीब 2 घंटे बचते हैं।